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फर्जी चिकित्सा के दुष्परिणाम साझा किए जाएं

स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में अनियमितताएं किस तरह बेलगाम हो गई हैं, इसका ताजा उदाहरण दमोह के फर्जी डॉक्टर का मामला है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर, किस तरह प्रशासन की आंखों में धूल झोंक कर मध्य प्रदेश के दमोह जिले का यह फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट ‘डॉक्टरÓ एन जॉन कैम सालों से लाचार, परेशान, मुसीबतों के मारे मरीजों का ईलाज कर रहा था? आरोपी ‘डाक्टरÓ का दुस्साहस देखिए कि उसने अपना असली नाम छिपा कर मेडिकल कम्युनिटी में अपनी अलग पहचान बनाने के लिए विदेशी नाम रखा था। दमोह जिले के मिशन अस्पताल में आरोपी डाक्टर का नाम डॉक्टर एन जॉन कैम दर्ज था जबकि उसका असली नाम नरेंद्र विक्रमादित्य यादव है। पूछताछ में आरोपी ने खुद को अविवाहित बताया है जबकि उसके फर्जी दस्तावेज में पत्नी और बच्चों के फेक नाम लिखे हुए हैं।
आरोपी का मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ ऐसे ही बेरोकटोक चलता रहता अगर इसके द्वारा की गई 15 लोगों की हार्ट सर्जरी के दौरान सात लोगों की जान नहीं चली गई होती। इस फर्जी डाक्टर की पहुंच, पहचान कितनी तगड़ी थी, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि 15 लोगों के हार्ट की सर्जरी करने वाले डॉक्टर ने 2006 में एक निजी अस्पताल में छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शुक्ला की सर्जरी भी की थी, जिसके बाद उनकी मौत हो गई थी। इसका दावा उनके बेटे ने किया है।
आखिर, इस तरह के लोगों की भनक तक प्रशासन, स्वास्थ्य महकमे  को क्यों नहीं लगती। आश्चर्य तो यह है कि ऐसे ज्यादातर मामलों का खुलासा तब होता है जब इनके कारनामे से बड़ा नुकसान हो जाता है। दरअसल, स्वास्थ्य सेवाओं के गोरखधंधे में कई चीजें शामिल हो गई हैं, जैसे कि स्वास्थ्य संबंधी धोखाधड़ी, बैंकिंग धोखाधड़ी, नकली दवाएं और अनियमित पैथोलॉजी लैब्स। स्वास्थ्य संबंधी धोखाधड़ी में ऐसे उत्पादों या सेवाओं का दावा करना शामिल है, जो बीमारियों को ठीक करने या रोकने का वादा करते हैं,  लेकिन वे सुरक्षित या प्रभावी नहीं होते। बैंकिंग धोखाधड़ी में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में धोखाधड़ीपूर्ण गतिविधियों द्वारा धन या सेवाएं प्राप्त करना शामिल है, जैसे कि झूठे दावे प्रस्तुत करना या अधिक बिलिंग करना। नकली दवाएं और अनियमित पैथोलॉजी लैब्स भी स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में गोरखधंधे के उदाहरण हैं।
फर्जी चिकित्सक नकली दवाओं के साथ-साथ जांच भी फर्जी कर रहे हैं। इसके लिए एक मशीन रख ली है, जिस पर हाथ रख कर ही 55 जांच करने का दावा कर रहे हैं। कई लोगों को इतना बीमार बता दिया जाता है कि वे सदमे में आ जाते हैं। लैब से जांच कराई तो सारी जांच गलत निकलती है। बताते चलें कि क्वांटम रेजोनेंस बॉडी हेल्थ एनालाइजर नामक मशीन जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में अप्रशिक्षित फर्जी चिकित्सकों द्वारा खूब इस्तेमाल की जा रही है। यह मशीन ऑनलाइन प्लेटफार्म पर मात्र दस से 12 हजार रु पये में मिल रही है। दावा किया जा रहा है कि मशीन में शरीर की 55 जांच महज कुछ मिनटों में हाथ रखने से ही हो जाती है। जांच के नाम पर लोग पैसे तो दे ही रहे हैं, साथ ही अप्रशिक्षित चिकित्सक जांच के आधार पर इलाज तक दे रहे हैं।
बिना डिग्री व बिना पंजीकरण वाले डाक्टरों पर अंकुश लगाना सबसे जरूरी है और इसके लिए सबसे पहले बनाना होगा नेशनल मेडिकल पोर्टल। जागरूकता अभियान चलाना चाहिए। फर्जी डॉक्टरों पर अंकुश लगाने के लिए केवल नियम-कानून बना देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि  जनता को ऐसे डॉक्टरों के बारे में सचेत भी करना होगा। आम जन को बताया जाना चाहिए नकली डॉक्टर के खिलाफ शिकायत कहां करें? मेडिकल काउंसिल को सक्रिय भूमिका निभानी होगी। बिना डिग्री या रजिस्ट्रेशन वाले फर्जी डॉक्टरों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार को सख्त कानून लागू करने चाहिए। भारत में झोलाछाप डॉक्टर के लिए दी जाने वाली सजा पर फिर से गौर करना चाहिए।
गौरतलब है कि झोलाछाप डॉक्टरों को धारा 15(4) धारा 15(2) के उल्लंघन के लिए दंड निर्धारित करती है। भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम, 1956 की धारा 15(3) में प्रावधान है कि उल्लंघन के परिणामस्वरूप एक वर्ष का कारावास या 1,000 रु पये का जुर्माना होगा। इसे और सख्त और कड़ा बनाने की जरूरत है। स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को नियमित जांच और निगरानी करनी चाहिए। मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से फर्जी चिकित्सा के दुष्परिणाम साझा किए जाएं। मेडिकल काउंसिल को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए और दोषियों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

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